Friday, 12 April 2019

हल्के-हल्के से ही बात भारी कही

हल्के-हल्के से ही बात भारी कही
मुख़्तसर ही मगर बात सारी कही

आरज़ू इश्क़ की जब न पूरी हुई
दर्द-ए-दिल ने ग़ज़ल इक मेआरी कही

वक़्त-ए-उल्फ़त हुआ ख़ूब, जब हिज्र से
वस्ल ने इश्क़ की बे-क़रारी कही

ख़्वाब में तुम ही तुम थे सो ताबीर ने
छाई हम पे तुम्हारी ख़ुमारी कही

दिन गया तो गई रात ने रात से
रात ग़मगीन कैसे गुज़ारी, कही 

मुफ़्लिसी ने मिटाकर जहाँ से हमें
मुफ़्लिसों से कहानी हमारी कही

हार कर उल्फ़तों से, अदावत ने फिर
दुनिया से इश्क़ की शानदारी कही

#अमित_अब्र