हसीं आग़ाज़ भी तुम हो, हसीं अंजाम भी तुम हो
मुहब्बत का जहाँ में इक हसीं पैग़ाम भी तुम हो
जुदा अंदाज़-ए-उल्फ़त है, जुदा जो नाम-ए-उल्फ़त है
जुदा अंदाज़ वो तुम हो, जुदा वो नाम भी तुम हो
क़रार आया तुम्हारी ही वजह से बे-क़रारी में
सुकूँ भी, चैन भी, जी का तमाम आराम भी तुम हो
मुहब्बत भी, वफ़ा भी और ईमाँ भी हुआ हासिल
मुहब्बत में मुहब्बत का हसीं ईनाम भी तुम हो
किसी का इश्क़ हो, दुनिया जहाँ हो अब किसी की तुम
किसी की हो शब-ओ-रोज़ और सुब्ह-ओ-शाम भी तुम हो
चले हो गर मुहब्बत का लिये पैग़ाम शानो पे
मुसाफ़िर हो, सफ़र हो और सफ़र का गाम भी तुम हो
दिया ईनाम दुनिया ने तुम्हें ऐ अब्र उल्फ़त का
कि अब मशहूर भी तुम हो यहाँ बदनाम भी तुम हो
#अमित_अब्र