Tuesday, 22 September 2020

मुहब्बत का ज़माने में जुदा अंदाज़ रखना

मुहब्बत का ज़माने में जुदा अंदाज़ रखना
किसी भी हाल क़ाएम इश्क़ का ए'ज़ाज़ रखना

सितमगर के सितम सहना मगर उल्फ़त की ख़ातिर 
हमेशा दफ़्न सीने में सनम के राज़ रखना

फ़लक पे इश्क़ के क़ाएम रहे रुत्बा तुम्हारा
फ़लक पे इश्क़ के शाहीन सी परवाज़ रखना

जहाँ की चाह गर्दिश में रहे उल्फ़त हमेशा
पर उल्फ़त की जहाँ में तुम बुलन्द आवाज़ रखना

कटेगें पर हर इक कोशिश में ऐ शाहीन-ए-उल्फ़त 
मगर हर हाल जारी कोशिश-ए-परवाज़ रखना

शहीदान-ए-मुहब्बत भी करेंगे नाज़ तुम पर
लिहाज़-ए-इश्क़ की ख़ातिर दिल-ए-जाँ-बाज़ रखना

ज़माना लाख ना-ख़ुश हो मगर गर यार खुश तो
न भाये इश्क़ में फिर हाल-ए-दिल ना-साज़ रखना

मुहब्बत ख़ुश रहे हर हाल ज़िम्मा है तुम्हारा
नहीं अच्छा मुहब्बत को कभी नाराज़ रखना 

न तड़पे रूह मेरी बाद मेरे, इल्तिजा है
मैं मर जाऊँ तो ज़िन्दा तुम मिरे अल्फ़ाज़ रखना

#अमित_अब्र