Saturday, 23 May 2020

मैं मैं न रहा

मैं मैं न रहा

उसे चाहा नहीं था मैंने
उसे पूजा था मैंने
कहते हैं इश्क़ को रब
सो की थी हम ने
बंदगी उस की
एहसास उसे जब हुआ
तो जगा गया 
इक उम्मीद 
और शुरू हुआ इक सिलसिला 
इंतिज़ार का जो चला मुद्दतों लेकिन 
फिर आई नज़र ना-उम्मीदी
और मार गई आधा मुझे
लेकिन इक भरोसा 
रब पे
बंदगी पे
अपनी चाहत की सदाक़त पे
सो रहा बरक़रार 
वो सिलसिला इंतिज़ार का 
और जारी रहा
और जारी ही रहा लेकिन 
ये पता भी न चला कि 
वो तवील इंतिज़ार 
कब मार गया पूरा मुझे 
और न बाक़ी रह गई थी 
कोई उम्मीद कोई इंतिज़ार 
फिर देखा जो ख़ुद को तो आया समझ
कि
मैं मैं न रहा
मैं मैं न रहा

#अमित_अब्र 

Monday, 11 May 2020

है इश्क़ इलाज-ए-नफ़रत दुनिया से फ़ाज़िल कहता है

है इश्क़ इलाज-ए-नफ़रत दुनिया से फ़ाज़िल कहता है
आसान नहीं पर ना-मुमकिन भी नहीं क़ाबिल कहता है 

राह-ए-मुहब्बत आसान नहीं इस मुश्किल दुनिया में 
दीवाने ही नहीं दीवानों का मुस्तकबिल कहता है 

मिलेगा चैन-ओ-सुकून तुम को आगोश में हमारे 
ग़मगीं मौज-ए-वफ़ा से उल्फ़त का साहिल कहता है

उल्फ़त में है तन्हाई रुस्वाई और जुदाई 
उल्फ़त के दीवानों से उल्फ़त का हासिल कहता है

मिट जायेगा नाम-ओ-निशान-ए-उल्फ़त लाख कहो पर
आबाद रहेगी दुनिया-ए-मुहब्बत दिल कहता है

#अमित_अब्र

22  22  22  22  22  22  22=28