Monday, 11 May 2020

है इश्क़ इलाज-ए-नफ़रत दुनिया से फ़ाज़िल कहता है

है इश्क़ इलाज-ए-नफ़रत दुनिया से फ़ाज़िल कहता है
आसान नहीं पर ना-मुमकिन भी नहीं क़ाबिल कहता है 

राह-ए-मुहब्बत आसान नहीं इस मुश्किल दुनिया में 
दीवाने ही नहीं दीवानों का मुस्तकबिल कहता है 

मिलेगा चैन-ओ-सुकून तुम को आगोश में हमारे 
ग़मगीं मौज-ए-वफ़ा से उल्फ़त का साहिल कहता है

उल्फ़त में है तन्हाई रुस्वाई और जुदाई 
उल्फ़त के दीवानों से उल्फ़त का हासिल कहता है

मिट जायेगा नाम-ओ-निशान-ए-उल्फ़त लाख कहो पर
आबाद रहेगी दुनिया-ए-मुहब्बत दिल कहता है

#अमित_अब्र

22  22  22  22  22  22  22=28



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