Thursday, 24 November 2022

इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है

इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है 
दिल और कुछ नहीं है इक घर वबाल का है

मुद्दत से कह रही है हर दास्तान-ए-उल्फ़त
कब फ़िक्र-ए-हिज्र थी मुद्दा तो विसाल का है

पहरे बहुत थे फिर भी मिल कर के उस से आया
यारों में आज चर्चा मेरी मजाल का है 

ये ज़िन्दगी कि जैसे हो एक मौज-ए-दरिया
किस्सा उरूज का कुछ किस्सा ज़वाल का है

रुस्वा बहुत हुआ दिल कर के फ़क़त मुहब्बत
मुझ को मलाल यारो दिल के मलाल का है 

मदहोश हो रहा है यूँ ही नहीं ज़माना
सारा ख़ुमार जानाँ तेरे जमाल का है

चेहरे जुदा-जुदा हैं पर हैं हसीन सारे
अल्लाह कारी-गर तू क्या ही कमाल का है 

तेरे नहीं मुक़ाबिल दुनिया में और कोई 
तू ही जवाब अपने हर इक सवाल का है

#अमित_सिंह
13-10-2022

कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है

कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है 
उस के बग़ैर दुनिया सराब नज़र आती है 

रुख़्सार हर्फ़-ए-उल्फ़त हैं होंट हर्फ़-ए-उल्फ़त
निगाह-ए-यार उल्फ़त की किताब नज़र आती है 

आसाँ हुआ सफ़र है हासिल हुई है मंज़िल 
साथ उस के ज़िन्दगी कामयाब नज़र आती है 

होती है ज़िन्दगी हक़ीक़त से रू-ब-रू जब 
तो मुहब्बत एक अधूरा ख़्वाब नज़र आती है

यूँ तो हैं लाखों ग़म जहाँ में लेकिन आज भी  
मुफ़्लिसी सब से बड़ा अज़ाब नज़र आती है

#अमित_सिंह 
12-10-2022

Thursday, 17 November 2022

बताया भी छिपाया भी हँसाया भी रुलाया भी

बताया भी छिपाया भी हँसाया भी रुलाया भी
सितम ढा कर मिरे दिल पे सितम-गर मुस्कुराया भी

कहानी में मुहब्बत की वो मेरे साथ आया भी  
कहानी में मुहब्बत फिर वो मेरी आज़माया भी

समंदर ज़िन्दगी का ज़िन्दगी में फ़ितरती निकला  
भँवर में ज़िन्दगी के वो डुबाया भी बचाया भी

ज़माना भी अजब किरदार में था ज़ीस्त में मेरी 
गले मुझ को लगाया भी लगाकर फिर भुलाया भी

तुम्हारी याद में ही शाम गुज़री और सहर आई
तुम्हारी याद में दीया जलाया भी बुझाया भी

ज़माने से रहे हम मुंतज़िर जिस शख़्स के यारों
वो बरसों बाद आया भी हमें आना जताया भी

अदावत भी रही उस से मुहब्बत भी रही उस से  
न जाने क्यूँ रहा वो शख़्स अपना भी पराया भी

शहर के साथ या-रब जल रही है लाश यारों की
शहर को अपने हम ने ही बसाया भी मिटाया भी

अदावत ने किया बर्बाद था लेकिन मुहब्बत ने 
ज़माने को बचाया भी बनाया भी सजाया भी

-अमित सिंह 
08-08-2020