1.
हँसती इस दुनिया को बेबस-ओ-बे-हिस लिखकर चला गया
ख़ुशियाँ भी हैं ग़मगीन यहाँ 'आनिस' लिखकर चला गया
2.
पूरी हो हर तमन्ना हर ख़्वाब हो मुकम्मल
हर आरज़ू तुम्हारी हो आरज़ू ख़ुदा की
3.
अब भीगती नहीं हैं आँखें किसी भी सूरत
रोया कभी बहुत था जाने के बा'द उस के
4.
मुद्दत से हो रहा हूँ क़िस्तों में क़त्ल यारो
इक इंतिज़ार पूरा मरने नहीं है देता
5.
पहुँच गया जो मंज़िल तक बन गया वो तारा आँखों का
बीच भँवर जो उलझ गई उस मौज को दुनिया क्या जाने
6.
छोटा था जो फ़साना अब है तवील तुम से
रूदाद कुछ न थी बिन किरदार के तुम्हारे
7.
मुहब्बत सा मुक़दमा दूसरा देखा नहीं हम ने
निगाहें जुर्म करतीं हैं भुगतना दिल को पड़ता है
8.
हुस्न करता है ज़ेहन में अब तो गर्दिश यार का
तेज़ होती है ये धड़कन जब वो आये ख़्वाब में
9.
ऐ ख़ुदा अब तू ही कर तारीफ़ मेरे यार की
हर्फ़ मेरे जल गये सब बर्क़-ए-हुस्न-ए-यार में
10.
क़ातिल निगाहें तेरी मशहूर हो रही हैं
कर जायेंगी किसी दिन ये क़त्ल याँ किसी को
11.
बहुत चाहता हूँ न देखूँ मगर दिल
अदा पे उसी की फ़िदा हो रहा है
12.
करती अगर है दुनिया जो इश्क़ इश्क़ से तो
आसान हिज्र क्यूँ है मुश्किल विसाल क्यूँ है
13.
जीना है तो जी तू इक ग़म-ज़दे की ख़ातिर
लाचार गर हुआ खुश तो खुश हुआ ख़ुदा है
14.
यूँ ही नहीं हुए हैं रौशन दिये वतन के
कल थे जले हज़ारों इस रौशनी की ख़ातिर
15.
मैं चल रहा हूँ लेकिन वो पल रुका हुआ है
जब वो मुझे मिला और मिल कर बिछड़ गया था
16.
हो जायेंगे दूर सारे बस यार साथ होगा
सोचा कभी न हम ने उल्फ़त की इस सिफ़त को
17.
ज़ख़्म-ए-फ़िराक़ तो है इक मौत के बराबर
मरता है इक परिन्दा मर जाए यार जिस का
18.
इश्क़ हो नाकाम तो दे हुस्न पर सौ तोहमतें
हार कर अब लोग देते दाग़ हैं बे-दाग़ को
19.
आदतन हुस्न ही था अभी तक मगर
अब अदा यार की क़त्ल हम को करे
20.
न अब है वस्ल की चाहत न अब है हिज्र का डर
मुहब्बत अब भला कैसे सतायेगी मुझे तू
21.
रुख़सार होंट गेसू नाराज़ सब हुए हैं
जब डूब कर तुम्हारी आँखों में रह गया हूँ
22.
ठहरा हुआ समंदर कब काम का रहा है
बहती हुई नदी से बुझती है प्यास सब की
23.
औरत है नाम याँ पे इक और ज़िन्दगी का
घुटती बहुत है लेकिन मिलती है मुस्कुरा कर
24.
जल्वा-ए-हुस्न-ए-दिलबर की बात हम करें क्या
ख़ुद रब ग़ुरूर में है कारीगरी पे अपनी
25.
साँसें ठहर गई हैं धड़कन भी थम गई है
जब दस्त-ए-यार आकर शानों पे रुक गये हैं
26.
वस्ल की आग जब भी जली रात भर
रात बन कर धुआँ फिर उड़ी रात भर
27.
एहसास-ए-ग़म नहीं तुम ग़मगीन को कराओ
बँध कर न एक दर से ख़ुशियाँ सदा रहीं हैं
28.
पढ़ता हूँ जब कभी भी चेहरे को तेरे मैं तो
आते नज़र हैं सारे अल्फ़ाज़ उल्फ़तों के
29.
सच झूट और फिर इक बेबस सी ज़िन्दगी है
कैसे बताएँ उलझी किस मोड़ पे मुहब्बत
30.
न कीजे फ़र्क लड़की में बहू-बेटी बता कर के
रहे चाहे जहाँ भी फूल खुश्बू ही बिखेरेगा
31.
बेचैन ही रहा मैं फिर शाम-ए-ज़िन्दगी तक
फ़ारिग़ किया न उस ने पूरी तरह से मुझ को
32.
वही था नज़र में जिगर में ज़ेहन में
यही बात लेकिन लबों तक न आई
33.
दर्द भी दर्द की दवा भी है
इश्क़ ही मर्ज़ भी शिफ़ा भी है
34.
ज़िन्दगी ज़िन्दगी थी साथ उस के
ख़ाक जीना हुआ बिना उस के
35.
तारीफ़ उस ख़ुदा की कैसे करूँ बताओ
दे कर के ग़म बताई क़ीमत ख़ुशी की जिस ने
36.
बे-शक़ मुख़ालिफ़त हो मुद्दे पे यारों लेकिन
लाज़िम है नर्म लहजा अंदाज़-ए-गुफ़्तुगू में
37.
है ज़ुल्फ़ खुल गई या गजरा बिखर गया है
उठ्ठी कहाँ से ख़ुश्बू मदहोश करने वाली
38.
गेसू खुले हैं उन के या घिर रही घटाएँ
किस बात पे फ़लक यूँ सरशार हो रहा है
39.
मैं लौटने लगा था जब हार मान कर के
अपने ही थे कि मेरी हिम्मत बढ़ा रहे थे
40.
चल चाल चाहे जितनी इतना मगर समझ ले
ऐ इश्क़ तेरी बातों में हम न आने वाले
41.
उन के ही दम से चलती है काएनात सारी
इक नाम राम से है रौशन जहान सारा
42.
विधि का विधान है ये या है रिवाज़-ए-दुनिया
आसान क्यूँ है नफ़रत मुश्किल है क्यूँ मुहब्बत
43.
यूँ ही नहीं हुआ ये मुल्क सुर्ख़-रू यारो
क़ुर्बां हुए कई तब आई ये रौशनी है
44.
यूँ ही नहीं मुहब्बत रौशन रही जहाँ में
आशिक़ कई जले तब आई ये रौशनी है
50.