दिलबर की जफ़ाओं से परेशान हुआ इश्क़
तौहीन-ए-वफ़ा देख पशेमान हुआ इश्क़
माँगी थी शब-ए-वस्ल मिली शाम-ए-जुदाई
इस फ़ितरत-ए-माशूक़ से हैरान हुआ इश्क़
जाते हो किधर राह-ए-मुहब्बत के सिवा आप
इस सर्द रवैये से तो बे-जान हुआ इश्क़
क्या हाल सुनायें दिल-ए-बिस्मिल का किसी को
कब इस दिल-ए-बिस्मिल पे मेहरबान हुआ इश्क
पल भर की ख़ुशी पा के मिले ग़म के ज़माने
पल भर के लिए ही मिरा मेहमान हुआ इश्क़
-अमित सिंह
221 1221 1221 122+1
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