Wednesday, 30 June 2021

दिलबर की जफ़ाओं से परेशान हुआ इश्क़

दिलबर की जफ़ाओं से परेशान हुआ इश्क़
तौहीन-ए-वफ़ा देख पशेमान हुआ इश्क़ 

माँगी थी शब-ए-वस्ल मिली शाम-ए-जुदाई
इस फ़ितरत-ए-माशूक़ से हैरान हुआ इश्क़ 

जाते हो किधर राह-ए-मुहब्बत के सिवा आप 
इस सर्द रवैये से तो बे-जान हुआ इश्क़ 

क्या हाल सुनायें दिल-ए-बिस्मिल का किसी को 
कब इस दिल-ए-बिस्मिल पे मेहरबान हुआ इश्क 

पल भर की ख़ुशी पा के मिले ग़म के ज़माने 
पल भर के लिए ही मिरा मेहमान हुआ इश्क़ 

-अमित सिंह

221 1221 1221 122+1

No comments:

Post a Comment