Tuesday, 29 October 2019

किस दुनिया में बसती बस्ती है

किस दुनिया में बसती बस्ती है
ग़म है फिर भी फ़ाक़ा-मस्ती है

जीने की ख़ातिर मुफ़्त में मरता
जाँ मुफ़्लिस की कितनी सस्ती है

लिबास हैं जिन के उजले-उजले
उन की काली वतन-परस्ती है

पत्थर दिल से उल्फ़त ठीक नहीं          
फ़िराक़, अंजाम-ए-बुत-परस्ती है

नाम-ए-मजहब और सियासत में 
चारों जानिब दराज़-दस्ती है

बातिल के आगे आज हुई फिर
मायूस सदाक़त की हस्ती है

उल्फ़त का परचम ऊँचा ही रहा
उल्फ़त में कब आई पस्ती है

उल्फ़त में कर तू यक़ीन जीत का
हासिल-ए-नफ़रत फ़क़त शिकस्ती है

#अमित_अब्र 

Monday, 28 October 2019

याद में उन की जी का मेरे, देखो काम तमाम हुआ

याद में उन की जी का मेरे, देखो काम तमाम हुआ 
सौ ज़ख़्म दिये इस उल्फ़त ने, इक ग़म आख़िर ईनाम हुआ 
 
तुम क्या जानो तासीर-ए-मुहब्बत, तुम क्या जानो मुहब्बत 
कल तक जो ज़ाहिर था बहुत, वो इश्क़ में पड़ गुमनाम हुआ 

दुनिया ने उस को छोड़ा, जिस ने ली याँ राह-ए-मुहब्बत 
दिल के मारों का नाम यहाँ, जाने क्यूँ बदनाम हुआ

शहीद-ए-उल्फ़त क्या क्या न सहे याँ इल्ज़ाम-ए-उल्फ़त में 
लैला तड़पी महलों में, सहरा मजनूँ के नाम हुआ

हाथ से मेरे प्यार गया, सरमाये की जो बात हुई 
ये दिल मेरा अनमोल था अब तक, अब था बे-दाम हुआ 

नफ़रत से सब को प्यार हुआ, चारों जानिब नफ़रत है
नफ़रत के आगे भी लेकिन प्यार कहाँ नाकाम हुआ 

ज़ेहन पे छाई एक ख़मोशी, दिल में था इक शोर उठा
कैसी थी ये दुनिया प्यारी, कैसा इसका अंजाम हुआ 

#अमित_अब्र

22 22 22 22 22 22 22 2=30



Sunday, 20 October 2019

तुम आये, चैन आया, पूरा जी का अरमान हुआ

तुम आये, चैन आया, पूरा जी का अरमान हुआ
नज़र नज़र में हुई गुफ़्तगू, सौदा दिल के दरम्यान हुआ 

तुम क्या हो मेरी ख़ातिर, देखो मेरी नज़रों से
घर, आँगन, कूचा सारा तुम बिन है वीरान हुआ 

तुम रूठे, जग रूठा, रूठे सूरज चाँद सितारे 
रूठ गये रिश्ते सारे, मैं भी ख़ुद से अंजान हुआ 

आबाद शहर वीरान हुआ, बस्ती भी सुनसान हुई
बाद तुम्हारे घर भी ये ख़ाली एक मकान हुआ 

खाये पत्थर उन की ख़ातिर, पर उन से हम मिल न सके
ज़ख़्मी सारा जिस्म हुआ, दिल भी था बे-जान हुआ 

तदबीर न कोई काम आई, आख़िर दोनों दूर हुए
दिल रोया तब, जब जारी हिजरत का फ़रमान हुआ 

अदा से चलना, अदा से रुकना, संग में रक़्स-ए-अबरू 
बिन ख़ंज़र क़ातिल मेरा महफ़िल का वो मेहमान हुआ 

जाने क्या थी मजबूरी, बीच सफ़र वो छोड़ गया
उस बिन मेरी दुनिया बंजर, जीवन रेगिस्तान हुआ 


#अमित_अब्र