Monday, 12 October 2020
ज़िन्दगी इक सवाल मुश्किल है
Tuesday, 6 October 2020
मुश्किलों में बयान रहता है
Tuesday, 22 September 2020
मुहब्बत का ज़माने में जुदा अंदाज़ रखना
Thursday, 6 August 2020
हर इक दौर ज़िन्दगी में लाती है मुफ़्लिसी
Monday, 27 July 2020
जो तुम हो यहाँ तो यहाँ ज़िन्दगी है
जो तुम हो यहाँ तो यहाँ ज़िन्दगी है
तुम्हारे बिना फिर कहाँ ज़िन्दगी है
ब-दौलत तुम्हारे थी जीने की हिम्मत
तुम्हारे बिना ना-तवाँ ज़िन्दगी है
न पूछो मिरा हाल-ए-दिल बा'द उन के
ग़म-ए-हिज्र करती बयाँ ज़िन्दगी है
सुबह शाम दिन दोपहर इक ख़मोशी
हुई यार बिन बे-ज़बाँ ज़िन्दगी है
मुनाफ़े में थी ज़िन्दगी साथ तेरे
नहीं साथ तू तो ज़ियाँ ज़िन्दगी है
हुआ हासिल-ए-इश्क़ मुझ को कहूँ क्या
फ़क़त अब ग़मों में निहाँ ज़िन्दगी है
जिगर आप ख़ंडर हुआ बा'द तेरे
वीरानी भरा इक मकाँ ज़िन्दगी है
मुहब्बत अदावत बग़ावत अदालत
बस इन के रही दरमियाँ ज़िन्दगी है
फ़साने अलम के तो किरदार ग़मगीं
अज़ाबों की इक दास्ताँ ज़िन्दगी है
सफ़र एक है धूल का धूल में ये
ग़ुबारों का इक कारवाँ ज़िन्दगी है
गुज़रता हूँ यादों के सहरा से जब तो
बिना आग होती धुआँ ज़िन्दगी है
#अमित_अब्र
Saturday, 11 July 2020
हो मुक़ाबिल की मुहब्बत हो हक़ीक़त या कि ख़्वाबी
Saturday, 4 July 2020
मिसाल-ए-जमाल इक यहाँ रह रहा है
रौशन हुआ फ़लक तो महकी हुई ज़मीं है
Tuesday, 9 June 2020
कैसी हुई ख़ता किस नाराज़गी के मारे
Saturday, 23 May 2020
मैं मैं न रहा
Monday, 11 May 2020
है इश्क़ इलाज-ए-नफ़रत दुनिया से फ़ाज़िल कहता है
Thursday, 2 April 2020
हर ओर अब सफ़र इक आसेब कर रहा है
Tuesday, 17 March 2020
कहानी नही हूँ, तहरीर हूँ मैं
Friday, 6 March 2020
मालिक मिरे ! दिलों को बे-शर्त तू मिला दे
Monday, 2 March 2020
इक आग उठ रही है, सब ख़ाक हो रहा है
Monday, 10 February 2020
रंग-ए-शफ़क़ वो, वो शाम का आफ़ताब लगता है
Thursday, 6 February 2020
मुहब्बत में दिल ग़म-ज़दा हो रहा है
Tuesday, 4 February 2020
इश्क़ ज़बान-ए-ख़ुदा है यारों
Saturday, 1 February 2020
ज़िन्दगी सफ़र तेरा मुश्किलों भरा क्यूँ है
ज़िन्दगी सफ़र तेरा मुश्किलों भरा क्यूँ है
रास्ते कठिन तो मंज़िल ख़फ़ा-ख़फ़ा क्यूँ है
राह पे वफ़ा की चलती रही हमेशा तू
ज़िन्दगी, मुहब्बत फ़िर तुझ से बे-वफ़ा क्यूँ है
याद-ए-यार ही क्या नासूर बन गई दिल में
ज़ख़्म पर हमारे अब बे-असर दवा क्यूँ है
बाद अब तुम्हारे मुफ़्लिस हुआ मुक़द्दर क्यूँ
बाद अब तुम्हारे ये ज़िन्दगी क़ज़ा क्यूँ है
रौशनी दिया तूने जान भी दिया लेकिन
ऐ दिये ! ख़िलाफ़ अब भी तेरे ये हवा क्यूँ है
क़ैद-ए-याद है या है मुंतज़िर किसी की तू
ज़ीस्त तुझ को तन्हाई का हुआ नशा क्यूँ है
बात कुछ तो तुझ में थी ज़िन्दगी, बता वर्ना
मौत, मौत पे तेरी आज ग़मज़दा क्यूँ है
ज़िन्दगी गुनहगारों में गिनी गई मेरी
ऐ ख़ुदा बता मुझ को इश्क़ याँ ख़ता क्यूँ है
छोड़ कर गये जब तुम तो वजह समझ आई
बाम-ओ-दर पे मायूसी, रंज में फ़ज़ा क्यूँ है
मौत की तमन्ना क्यूँ आरज़ू न जीने की
बाद अब तुम्हारे ये ज़िन्दगी सज़ा क्यूँ है
#अमित_अब्र
212 1222 212 1222
Friday, 17 January 2020
इश्क़ उल्फ़त भरी इक नज़र है मियाँ
इश्क़ उल्फ़त भरी इक नज़र है मियाँ
इश्क़ उन की अदा का क़हर है मियाँ
मो'जज़ा कुछ नहीं, बात इतनी सी है
इश्क़ उन की नज़र का असर है मियाँ
क्या सुबह शाम क्या रात दिन दोपहर
याँ सफ़र इश्क़ का हर पहर है मियाँ
वस्ल या हिज्र या इक सफ़र रेत का
इश्क़ ग़म या ख़ुशी या शरर है मियाँ
मौत से रू-ब-रू होती है ज़िन्दगी
इश्क़ तो मौत से बे-ख़बर है मियाँ
ज़ुल्म के बीच जारी रहा इश्क़ है
इश्क़ पे ज़ुल्म याँ बे-असर है मियाँ
राह पे इश्क़ की चलना ही इश्क़ है
इश्क़ मंज़िल नहीं है, सफ़र है मियाँ
#अमित_अब्र
212 212 212 212
Wednesday, 15 January 2020
दिलबर की याद में बे-चैन मेरा दिल है
दिलबर की याद में बे-चैन मेरा दिल है
सज़ा-ए-उल्फ़त है या वफ़ा का हासिल है
डूबे तो ठीक थे, निकले तो जल उठे हैं
दरिया-ए-इश्क़ का आतिश-मिज़ाज साहिल है
उल्फ़त की दास्ताँ सुन आया यक़ीन ये
राह-ए-मुहब्बत दिलबर बग़ैर मुश्किल है
नज़र-अंदाज़ हुआ जो निगाह-ए-यार से, तो
दुुनिया ही नहीं, दिल आप से भी ग़ाफ़िल है
मुजरिम बता दिया है क्या यार ने मुझे
जो नाम पे मेरे बे-ज़ुबान महफ़िल है
सहरा से जो गुज़रे तो ख़याल-ए-क़ैस आया
उस दिल-ए-बिस्मिल का दिल आज भी क़ाइल है
बरसों रहा सफ़र में कौन उस की ख़ातिर
मिलने को आज उस से बे-क़रार मंज़िल है
#अमित_अब्र
22 22 22 22 22 2=22
Wednesday, 8 January 2020
हो तुम तो दुनिया की शान-ओ-मान है मुहब्बत
Sunday, 5 January 2020
कर के रुस्वा मुझ को, वो भी पछताया होगा
कर के रुस्वा मुझ को, वो भी पछताया होगा
छुप कर ही सही, जनाज़े में मिरे आया होगा
आया होगा ज़िक्र मिरा, जब ज़िक्र-ए-मुहब्बत में
हाल-ए-दिल अपना वो, ब-मुश्किल सब से छुपाया होगा
दूर हुए जो दस्तूर-ए-दुनिया की ब-दौलत हम
फिर नींद न आई हम को, वो भी न सो पाया होगा
हो के ग़ैर का तस्वीर हमारी जलायी होगी
यादों से मगर अपनी हम को न भुलाया होगा
ख़्वाब तो आते होंगे मेरे अक्सर उस को
ताबीरों ने भी पता मेरा उस को बताया होगा
अर्ज़-ए-दुनिया पे मुहब्बत के लिए, वो हिज्र में भी
दर्द भरे दिल से, गीत उल्फ़त के गाया होगा
गुज़र गया होगा दर्द-ए-दिल, जब हद से अपने
फिर दिल, हाल-ए-दिल पे अपने मुस्काया होगा
#अमित_अब्र
22 22 22 22 22 22 2 =26