Saturday, 11 July 2020

हो मुक़ाबिल की मुहब्बत हो हक़ीक़त या कि ख़्वाबी

हो मुक़ाबिल की मुहब्बत हो हक़ीक़त या कि ख़्वाबी
हुस्न गर हो चाँद सा तो इश्क़ भी हो आफ़ताबी

फ़र्क रंगत में न कर तू तो ख़ुदा भी साथ होगा
रात से गर प्यार है तो यार होगा माहताबी 

अहल-ए-दुनिया की नज़र में एक मयख़ाना हुआ वो
नैन उस के हैं बनाए आज दुनिया को शराबी

तिश्नगी तेरी करेगी फ़ैसला इस बात का अब
आब हो जाएगा सहरा या रहेगा वो सराबी

दौर-ए-हाज़िर की तबाही का सबब है बद-गुमानी
यार ने तोड़ा भरोसा आई रिश्ते में ख़राबी

#अमित_अब्र

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