Friday, 13 January 2023

वादे से इक तुम्हारे मजबूर हो गये

वादे से इक तुम्हारे मजबूर हो गये 
ख़ातिर तुम्हारी तुम से हम दूर हो गये

ख़्वाहिश हमारे दिल की दिल ही में रह गयी
अरमान-ए-यार आगे मा'ज़ूर हो गये 

बर्क़-ए-जमाल-ओ-हुस्न-ए-दिलबर में चाँद क्या
सूरज के साथ तारे बे-नूर हो गये

उल्फ़त की चाह हम को बदनाम कर गयी
वो इश्क़ कर लिए और मशहूर हो गये

उन की जिरह के आगे मेरी दलील क्या 
सारे सुबूत भी ना-मंज़ूर हो गये

-अमित सिंह 
27/5/2018

Monday, 19 December 2022

जब से मिला हूँ उस से मैं इश्क़ लिख रहा हूँ

जब से मिला हूँ उस से मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
भूले न वो भुलाये मैं इश्क़ लिख रहा हूँ

इक दास्तान-ए-उल्फ़त मुझ में तुम्हें मिलेगी
अपने किताब-ए-दिल पे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ 

फ़रहाद-ओ-शीरीं राँझा-ओ-हीर क़ैस-ओ-लैला 
क़िस्से इन्ही के पढ़ के मैं इश्क़ लिख रहा हूँ

लिखने की बात क्या अब चर्चा तलक है मुश्किल
दिल जानता है कैसे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ

आसान कब रहा है उल्फ़त बयान करना
तौफ़ीक़ ऐ ख़ुदा दे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ

-अमित सिंह 
27-11-2021

Thursday, 24 November 2022

इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है

इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है 
दिल और कुछ नहीं है इक घर वबाल का है

मुद्दत से कह रही है हर दास्तान-ए-उल्फ़त
कब फ़िक्र-ए-हिज्र थी मुद्दा तो विसाल का है

पहरे बहुत थे फिर भी मिल कर के उस से आया
यारों में आज चर्चा मेरी मजाल का है 

ये ज़िन्दगी कि जैसे हो एक मौज-ए-दरिया
किस्सा उरूज का कुछ किस्सा ज़वाल का है

रुस्वा बहुत हुआ दिल कर के फ़क़त मुहब्बत
मुझ को मलाल यारो दिल के मलाल का है 

मदहोश हो रहा है यूँ ही नहीं ज़माना
सारा ख़ुमार जानाँ तेरे जमाल का है

चेहरे जुदा-जुदा हैं पर हैं हसीन सारे
अल्लाह कारी-गर तू क्या ही कमाल का है 

तेरे नहीं मुक़ाबिल दुनिया में और कोई 
तू ही जवाब अपने हर इक सवाल का है

#अमित_सिंह
13-10-2022

कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है

कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है 
उस के बग़ैर दुनिया सराब नज़र आती है 

रुख़्सार हर्फ़-ए-उल्फ़त हैं होंट हर्फ़-ए-उल्फ़त
निगाह-ए-यार उल्फ़त की किताब नज़र आती है 

आसाँ हुआ सफ़र है हासिल हुई है मंज़िल 
साथ उस के ज़िन्दगी कामयाब नज़र आती है 

होती है ज़िन्दगी हक़ीक़त से रू-ब-रू जब 
तो मुहब्बत एक अधूरा ख़्वाब नज़र आती है

यूँ तो हैं लाखों ग़म जहाँ में लेकिन आज भी  
मुफ़्लिसी सब से बड़ा अज़ाब नज़र आती है

#अमित_सिंह 
12-10-2022

Thursday, 17 November 2022

बताया भी छिपाया भी हँसाया भी रुलाया भी

बताया भी छिपाया भी हँसाया भी रुलाया भी
सितम ढा कर मिरे दिल पे सितम-गर मुस्कुराया भी

कहानी में मुहब्बत की वो मेरे साथ आया भी  
कहानी में मुहब्बत फिर वो मेरी आज़माया भी

समंदर ज़िन्दगी का ज़िन्दगी में फ़ितरती निकला  
भँवर में ज़िन्दगी के वो डुबाया भी बचाया भी

ज़माना भी अजब किरदार में था ज़ीस्त में मेरी 
गले मुझ को लगाया भी लगाकर फिर भुलाया भी

तुम्हारी याद में ही शाम गुज़री और सहर आई
तुम्हारी याद में दीया जलाया भी बुझाया भी

ज़माने से रहे हम मुंतज़िर जिस शख़्स के यारों
वो बरसों बाद आया भी हमें आना जताया भी

अदावत भी रही उस से मुहब्बत भी रही उस से  
न जाने क्यूँ रहा वो शख़्स अपना भी पराया भी

शहर के साथ या-रब जल रही है लाश यारों की
शहर को अपने हम ने ही बसाया भी मिटाया भी

अदावत ने किया बर्बाद था लेकिन मुहब्बत ने 
ज़माने को बचाया भी बनाया भी सजाया भी

-अमित सिंह 
08-08-2020

Saturday, 29 October 2022

कैसे उसे बताएँ कैसी है बे-क़रारी

कैसे उसे बताएँ कैसी है बे-क़रारी

आलम है हिज्र का तो बाक़ी है इंतिज़ारी


करता नहीं यक़ीं वो पर बात सच यही है
उस के बग़ैर जी में उठती है हूक भारी


इक ज़ब्त-ए-इश्क़ मेरी दुनिया बदल रहा है
क्या जानिए कहाँ अब ले जाये ये ख़ुमारी


उस के जुनून का है अब इख़्तियार मुझ पर
चलती नहीं है मुझ पर ख़ुद मेरी इख़्तियारी


है क़ैद में मुहब्बत किरदार ग़म-ज़दा हैं
रूदाद-ए-इश्क़ में है अब दर्द की शुमारी


फ़रियाद में मुझे वो जब रब से माँगता है
फ़िरदौस में उभरती है आह एक प्यारी


अंजाम-ए-इश्क़ में रख दो कहकशाँ हमारे
आग़ाज़-ए-इश्क़ हम ने काँटों में है गुज़ारी


हर इश्क़ हो मुकम्मल हर हाल में ज़मीं पे
कर ऐ ख़ुदा फ़लक से फ़रमान-ए-इश्क़ जारी


रुख़्सत हुए अगर तुम बेज़ार मेरे दर से 
बेज़ारी में फिर कटेगी मेरी ये उम्र सारी


यूँ ही नहीं तुम्हारा दर आज हम से छूटा
ऐ इश्क़ राह तेरी हम ने बहुत निहारी


हैं दर्द में मरासिम तन्हा हुआ जहाँ है
अपनों के वार से ही ये काएनात हारी


दार-ओ-मदार-ए-दुनिया सिर आन अब पड़ी है
कैसे करूँ मुहब्बत मैं तुझ पे जाँ-निसारी


-अमित सिंह

कारवान-ए-ख़याल है ज़िन्दगी

कारवान-ए-ख़याल है ज़िन्दगी
इक उरूज-ओ-ज़वाल है ज़िन्दगी 

दम-ब-दम कुछ न कुछ है ये पूछती 
आदतन इक सवाल है ज़िन्दगी 

रंज भी रंज की शिफ़ा भी है ज़ीस्त 
लाज़िमन बा-कमाल है ज़िन्दगी

आशिकों की नज़र बयाँ है किए 
जान-ए-जाँ का जमाल है ज़िन्दगी

हाल-ए-दिल क्या कहें कि अब इश्क़ में
यार बिन इक मलाल है ज़िन्दगी 

हार कर बार बार है जीतती 
हौसलों की मिसाल है ज़िन्दगी

#अमित_अब्र