मुझे मेरा भारत अखण्ड चाहिए
Friday, 13 January 2023
वादे से इक तुम्हारे मजबूर हो गये
Monday, 19 December 2022
जब से मिला हूँ उस से मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
Thursday, 24 November 2022
इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है
कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है
Thursday, 17 November 2022
बताया भी छिपाया भी हँसाया भी रुलाया भी
Saturday, 29 October 2022
कैसे उसे बताएँ कैसी है बे-क़रारी
कैसे उसे बताएँ कैसी है बे-क़रारी
आलम है हिज्र का तो बाक़ी है इंतिज़ारी
करता नहीं यक़ीं वो पर बात सच यही है
उस के बग़ैर जी में उठती है हूक भारी
इक ज़ब्त-ए-इश्क़ मेरी दुनिया बदल रहा है
क्या जानिए कहाँ अब ले जाये ये ख़ुमारी
उस के जुनून का है अब इख़्तियार मुझ पर
चलती नहीं है मुझ पर ख़ुद मेरी इख़्तियारी
है क़ैद में मुहब्बत किरदार ग़म-ज़दा हैं
रूदाद-ए-इश्क़ में है अब दर्द की शुमारी
फ़रियाद में मुझे वो जब रब से माँगता है
फ़िरदौस में उभरती है आह एक प्यारी
अंजाम-ए-इश्क़ में रख दो कहकशाँ हमारे
आग़ाज़-ए-इश्क़ हम ने काँटों में है गुज़ारी
हर इश्क़ हो मुकम्मल हर हाल में ज़मीं पे
कर ऐ ख़ुदा फ़लक से फ़रमान-ए-इश्क़ जारी
रुख़्सत हुए अगर तुम बेज़ार मेरे दर से
बेज़ारी में फिर कटेगी मेरी ये उम्र सारी
यूँ ही नहीं तुम्हारा दर आज हम से छूटा
ऐ इश्क़ राह तेरी हम ने बहुत निहारी
हैं दर्द में मरासिम तन्हा हुआ जहाँ है
अपनों के वार से ही ये काएनात हारी
दार-ओ-मदार-ए-दुनिया सिर आन अब पड़ी है
कैसे करूँ मुहब्बत मैं तुझ पे जाँ-निसारी
-अमित सिंह