कूचा-ए-दिल में रूह बेताब नज़र आती है
उस के बग़ैर दुनिया सराब नज़र आती है
रुख़्सार हर्फ़-ए-उल्फ़त हैं होंट हर्फ़-ए-उल्फ़त
निगाह-ए-यार उल्फ़त की किताब नज़र आती है
आसाँ हुआ सफ़र है हासिल हुई है मंज़िल
साथ उस के ज़िन्दगी कामयाब नज़र आती है
होती है ज़िन्दगी हक़ीक़त से रू-ब-रू जब
तो मुहब्बत एक अधूरा ख़्वाब नज़र आती है
यूँ तो हैं लाखों ग़म जहाँ में लेकिन आज भी
मुफ़्लिसी सब से बड़ा अज़ाब नज़र आती है
#अमित_सिंह
12-10-2022
No comments:
Post a Comment