इश्क़ और क्या है क़िस्सा दिल के ख़याल का है
दिल और कुछ नहीं है इक घर वबाल का है
मुद्दत से कह रही है हर दास्तान-ए-उल्फ़त
कब फ़िक्र-ए-हिज्र थी मुद्दा तो विसाल का है
पहरे बहुत थे फिर भी मिल कर के उस से आया
यारों में आज चर्चा मेरी मजाल का है
ये ज़िन्दगी कि जैसे हो एक मौज-ए-दरिया
किस्सा उरूज का कुछ किस्सा ज़वाल का है
रुस्वा बहुत हुआ दिल कर के फ़क़त मुहब्बत
मुझ को मलाल यारो दिल के मलाल का है
मदहोश हो रहा है यूँ ही नहीं ज़माना
सारा ख़ुमार जानाँ तेरे जमाल का है
चेहरे जुदा-जुदा हैं पर हैं हसीन सारे
अल्लाह कारी-गर तू क्या ही कमाल का है
तेरे नहीं मुक़ाबिल दुनिया में और कोई
तू ही जवाब अपने हर इक सवाल का है
#अमित_सिंह
13-10-2022
No comments:
Post a Comment