जब से मिला हूँ उस से मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
भूले न वो भुलाये मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
इक दास्तान-ए-उल्फ़त मुझ में तुम्हें मिलेगी
अपने किताब-ए-दिल पे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
फ़रहाद-ओ-शीरीं राँझा-ओ-हीर क़ैस-ओ-लैला
क़िस्से इन्ही के पढ़ के मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
लिखने की बात क्या अब चर्चा तलक है मुश्किल
दिल जानता है कैसे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
आसान कब रहा है उल्फ़त बयान करना
तौफ़ीक़ ऐ ख़ुदा दे मैं इश्क़ लिख रहा हूँ
-अमित सिंह
27-11-2021
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