Friday, 13 January 2023

वादे से इक तुम्हारे मजबूर हो गये

वादे से इक तुम्हारे मजबूर हो गये 
ख़ातिर तुम्हारी तुम से हम दूर हो गये

ख़्वाहिश हमारे दिल की दिल ही में रह गयी
अरमान-ए-यार आगे मा'ज़ूर हो गये 

बर्क़-ए-जमाल-ओ-हुस्न-ए-दिलबर में चाँद क्या
सूरज के साथ तारे बे-नूर हो गये

उल्फ़त की चाह हम को बदनाम कर गयी
वो इश्क़ कर लिए और मशहूर हो गये

उन की जिरह के आगे मेरी दलील क्या 
सारे सुबूत भी ना-मंज़ूर हो गये

-अमित सिंह 
27/5/2018

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