कारवान-ए-ख़याल है ज़िन्दगी
इक उरूज-ओ-ज़वाल है ज़िन्दगी
दम-ब-दम कुछ न कुछ है ये पूछती
आदतन इक सवाल है ज़िन्दगी
रंज भी रंज की शिफ़ा भी है ज़ीस्त
लाज़िमन बा-कमाल है ज़िन्दगी
आशिकों की नज़र बयाँ है किए
जान-ए-जाँ का जमाल है ज़िन्दगी
हाल-ए-दिल क्या कहें कि अब इश्क़ में
यार बिन इक मलाल है ज़िन्दगी
हार कर बार बार है जीतती
हौसलों की मिसाल है ज़िन्दगी
#अमित_अब्र
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