इश्क़ करते हैं तो ख़ता क्या है
ग़र ख़ता है भी तो सज़ा क्या है
सुन रहे हो ना तुम मेरी धड़कन
मेरे दिल की सुनो रज़ा क्या है
इश्क़ पे ही नहीं यक़ीं तुम को
तुम से मैं क्या कहूँ वफ़ा क्या है
जान देना जो कम है तो कहिए
इश्क़ की और इंतिहा क्या है
कीजिए इश्क़ बन्दगी की जगह
और फिर जानिए ख़ुदा क्या है
#अमित_अब्र
06-09-2021
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