याद में उस की अजब सी बे-क़रारी दिल में है
वो नहीं है पास पर उस की ख़ुमारी दिल में है
भूलता हूँ ये जहाँ जब यार आता है नज़र
दूर होता है तो उठती हूक भारी दिल में है
बे-वफ़ा है वो कि है मजबूर सब के सामने
है हक़ीक़त क्या इसी की जंग जारी दिल में है
क्या बताएँ इश्क़ की तासीर का आलम तुम्हें
अक्स ज़ेहन में तो उस की यादगारी दिल में है
इश्क़ पे बढ़ता गया है ज़ुल्म-ए-दुनिया दिन-ब-दिन
देख उल्फ़त पे सितम इक आह-ओ-ज़ारी दिल में है
जाँ-ब-लब थे हम मगर मिलने न आया था सनम
इसलिए है चश्म-ए-नम तो ज़ख़्म-ए-कारी दिल में है
आज भी कल की तरह मजबूर उल्फ़त है यहाँ
इश्क़ की इस बेबसी पे सोगवारी दिल में है
शान-ओ-शौकत ने किया मग़रूर है पर आज भी
इश्क़ की ख़ातिर सनम इक ख़ाकसारी दिल में है
नाम आये गर कहानी में तो हमदम तू न डर
आज भी महफ़ूज़ तेरी राज़दारी दिल में है
बाद तुम को माँगने के कुछ न माँगू रब से मैं
आरज़ू भी जुस्तुजू भी बस तुम्हारी दिल में है
तू न आयेगी मगर चाहत पे अपनी है यक़ीं
ऐ मुहब्बत अब भी तेरी इंतिज़ारी दिल में है
#अमित_अब्र
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