सौदा दिल का बुरा नहीं होता
इश्क़ घाटा नफ़ा नहीं होता
इश्क़ ज़्यादा ज़रा नहीं होता
इश्क़ होता है या नहीं होता
बात कुछ तो है इश्क़ में वर्ना
दिल किसी पे फ़िदा नहीं होता
वस्ल या हिज्र या ख़ुशी या ग़म
इश्क़ बे-माजरा नहीं होता
होता हर इश्क़ गर मुकम्मल तो
क़ैस यूँ ग़म-ज़दा नहीं होता
इश्क़ में जो मिला अगर तो फिर
दर्द दिल से जुदा नहीं होता
हाल-ए-दिल होता है बुरा यारो
दिल किसी का बुरा नहीं होता
वो तो नाराज़ है बहुत लेकिन
क्यूँ मैं उस से ख़फ़ा नहीं होता
मिलते वो हम से रोज़ हैं लेकिन
मिलने सा वाक़िआ' नहीं होता
सब से मिलता है सब का हो कर वो
जाने क्यूँ बस मिरा नहीं होता
तोहमतें हुस्न पर हमेशा क्यूँ
इश्क़ क्या बे-वफ़ा नहीं होता
फ़र्क हम ने किया बहुत लेकिन
इश्क़ रब से जुदा नहीं होता
-अमित सिंह
05-07-2018
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