वजूद-ए-मुहब्बत सवालों में है
नहीं गर तू मेरे ख़यालों में है
कि तू जो है शामिल हर इक ख़्वाब में
हर इक रात मेरी उजालों में है
लिखा है दिलों पे मुहब्बत ने जो
कहाँ वो कहानी रिसालों में है
मुहब्बत की ख़ातिर है जो इश्क़ में
कहाँ बात वो हुस्न वालों में है
है मदहोश जिस में मुहब्बत भी अब
वही जाम याँ आज प्यालों में है
किसी का फ़साना अधूरा रहा
किसी की कहानी हवालों में है
नहीं इश्क़ में आबलों से तू डर
मुहब्बत निहाँ आज छालों में है
शब-ए-वस्ल की उम्र पल भर की थी
शब-ए-हिज्र की उम्र सालों में है
हवा से लड़ा इक दिया उम्र भर
मुहब्बत अब उस की मिसालों में है
#अमित_अब्र
No comments:
Post a Comment