Monday, 12 October 2020

ज़िन्दगी इक सवाल मुश्किल है

ज़िन्दगी इक सवाल मुश्किल है
दर्द की देख-भाल मुश्किल है 

फिर से महबूब लौट आयेगा 
फिर से होगा कमाल मुश्किल है

इश्क़ ग़मगीन है कि अब इस में
हिज्र आसाँ विसाल मुश्किल है 

हो गया दिल असीर-ए-उल्फ़त तो
दिल का होना बहाल मुश्किल है

हो न अपना ख़याल मुमकिन है
हो न उन का ख़याल मुश्किल है

आ गई जो उरूज पे इक बार
फिर अना का ज़वाल मुश्किल है

लाख कोशिश करूँ मगर मिलनी
मीर की अब मिसाल मुश्किल है

#अमित_अब्र 

कर गया हिज्र फ़ासला इतना
दिल-ए-नादाँ विसाल मुश्किल है 


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