जवाब की खोज है सवाल है ज़िन्दगी
हवाओं में दीप की मिसाल है ज़िन्दगी
हसीन-ओ-मसरूर यूँ तो दिखती है ख़्वाब में
मगर हक़ीक़त में इक मलाल है ज़िन्दगी
रहे सनम सामने जो मुस्कुराता हुआ
किसी ग़ज़ल का लगे जमाल है ज़िन्दगी
कभी ज़मीं पे रहे कभी फ़लक पे चले
उरूज है तो कभी ज़वाल है ज़िन्दगी
जो मुश्किलें भी पड़ें तो ये गुज़र जायेगी
हर एक सूरत में बा-कमाल है ज़िन्दगी
#अमित_सिंह
1212 212 1212 212
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