Tuesday, 4 February 2020

इश्क़ ज़बान-ए-ख़ुदा है यारों

इश्क़ ज़बान-ए-ख़ुदा है यारों
इश्क़ की राह वफ़ा है यारों 

फिर इश्क़ भी होगा आप ख़फ़ा 
गर हम-नफ़स ख़फ़ा है यारों

तब अश्क़ है इक पुर-दर्द आब
गर यार बे-वफ़ा है यारों 

नफ़रत भरे इस जहाँ की ख़ातिर 
फ़क़त इश्क़ ही भला है यारों 

गर हिज्र है तो होगा वस्ल भी 
ये इश्क़ का क़ायदा है यारों 

बाद हज़ारों कोशिश-ए-दुनिया 
हुस्न कब इश्क़ से जुदा है यारों 

दरिया-ए-दुनिया के भँवर का
बस ख़ुदा ही नाख़ुदा है यारों 

तन्हा समझ रहे हो जिसे, वो
उल्फ़त में गुम-शुदा है यारों 

जानिब-ए-ख़ुदा से इस ज़िन्दगी में 
एक मुहब्बत ही तयशुदा है यारों 

#अमित_अब्र


22       22        22      22=16






No comments:

Post a Comment