रंग-ए-शफ़क़ वो, वो शाम का आफ़ताब लगता है
सितारों भरी रात में खिला माहताब लगता है
रंग-ए-शफ़क़ = शाम की लालिमा का रंग
आफ़ताब =सूरज
माहताब =चाँद
दुनिया के गुलशन में वो भरता है रंग इस क़दर
कभी मुसव्विर-ए-जहाँ, कभी सुर्ख़ाब लगता है
मुसव्विर-ए-जहाँ =painter of world
सुर्ख़ाब = a colorful bird
जुल्फ़ घटा तो झील आँखें हैं रुख़्सार गुलाबी
अदाओं से तो अपनी वो लाजवाब लगता है
रुख़्सार = cheek
पाकर एक नज़र उस की इश्क़ डूब है जाता
दरिया-ए-इश्क़ में वो हुस्न का गिर्दाब लगता है
गिर्दाब = भँवर
यूँ तो हसीं बहुत हैं दुनिया में यारों लेकिन
यार हमारा आप हसीनों का ख़्वाब लगता है
पड़ते हैं अंजुमन में जब जब हसीं क़दम उन के
मंज़र-ए-महफ़िल तब तब दिलकश-ओ-नायाब लगता है
अंजुमन =महफ़िल
नायाब = rare
तस्वीर-ए-यार देखूँ जो सुर्ख़ जोड़े में तो फिर
दिल-ए-नादाँ बे-बस-ओ-बे-क़रार-ओ-बे-ताब लगता है
#अमित_अब्र
22 22 22 22 22 22 2
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