Friday, 17 January 2020

इश्क़ उल्फ़त भरी इक नज़र है मियाँ

इश्क़ उल्फ़त भरी इक नज़र है मियाँ
इश्क़ उन की अदा का क़हर है मियाँ

मो'जज़ा कुछ नहीं, बात इतनी सी है
इश्क़ उन की नज़र का असर है मियाँ

क्या सुबह शाम क्या रात दिन दोपहर
याँ सफ़र इश्क़ का हर पहर है मियाँ

वस्ल या हिज्र या इक सफ़र रेत का
इश्क़ ग़म या ख़ुशी या शरर है मियाँ

मौत से रू-ब-रू होती है ज़िन्दगी
इश्क़ तो मौत से बे-ख़बर है मियाँ

ज़ुल्म के बीच जारी रहा इश्क़ है
इश्क़ पे ज़ुल्म याँ बे-असर है मियाँ

राह पे इश्क़ की चलना ही इश्क़ है
इश्क़ मंज़िल नहीं है, सफ़र है मियाँ

#अमित_अब्र
212       212    212     212 




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