मालिक मिरे ! दिलों को बे-शर्त तू मिला दे
हैं दूरियाँ अगर तो, तू दूरियाँ मिटा दे
नाकाम कर उन्हें रब, जो हैं हुए फ़सादी
हैं जो ख़िलाफ़-ए-ज़ुल्म, उन का हौसला बढ़ा दे
हो जाए ख़ाक जिस में, हर नफ़रत इस जहाँ की
भगवान् ! आग ऐसी दुनिया में तू जला दे
शाबाशियाँ उन्हें दे, जो लड़ रहे बला से
रब ! जीत का उन्हें जज़्बा और तू ज़रा दे
क़ातिल हुई सियासत, सब जानते हैं लेकिन
है कौन जो हुकूमत को, आज आइना दे
मैदान-ए-जंग-ए-उल्फ़त में, इश्क़ ही की ख़ातिर
तू बे-लहू बदन को, हिम्मत मिरे ख़ुदा दे
इंसान नेकियों से, फिर दूर हो रहा है
करना दिलों को फिर से, तू नेकियाँ सिखा दे
नादिम हुआ ख़ुदा है, इंसाँ की देख फ़ितरत
कैसे बता हमें वो, खुशियों भरी दुआ दे
कश्ती फँसी भँवर में, नाराज़ नाख़ुदा है
हो पार नाव मेरी, ठोकर ख़ुदा लगा दे
है आख़िरी तमन्ना, ऐ रब जहाँ की ख़ातिर
कर रौशनी दिलों में, सब नफ़रतें बुझा दे
बेख़ौफ़ चल रहा हूँ, ले कर मशाल-ए-उल्फ़त
रब आज राह-ए-उल्फ़त में, दीप तू जला दे
#अमित_अब्र
221 2122 221 2122
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