Tuesday, 21 December 2021

मिला वो मुझे यूँ कि फिर न मिला

मिला वो मुझे यूँ कि फिर न मिला

रहा उम्र भर फिर इसी का गिला


नहीं इश्क़ जब साथ मेरे चला 

चला साथ इक दर्द का काफ़िला


शब-ए-वस्ल मुझ को न मुमकिन हुई 

शब-ए-हिज्र का बस रहा सिलसिला


हुआ यार ख़ुर्शीद जब रेत का

नहीं रेत में गुल कभी फिर खिला


मिली थी मुझे राह में रौशनी 

मगर साथ तारीक मेरे चला


#अमित_अब्र

No comments:

Post a Comment