Saturday, 18 December 2021

तिरी याद मुझ को सताती रही

तिरी याद मुझ को सताती रही

मुझे चाँदनी भी जलाती रही


तुझे भूल जाये इसी आस में

नज़र ख़्वाब तेरे भुलाती रही 


बयाबाँ हुआ इश्क़ जब यार बिन 

बयाबानी दिल में समाती रही


दिल अपना ही दुश्मन हुआ इश्क़ में

गया यार तो जान जाती रही


थी ख़्वाबों की कोशिश हँसाने की पर

हक़ीक़त हमेशा रुलाती रही


#अमित_अब्र

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