Thursday, 16 December 2021

हुई मह से जब आशनाई मिरी

हुई मह से जब आशनाई मिरी

हुई फिर न शब से रिहाई मिरी


नुमायाँ था वो पर न मिलना हुआ 

कि उस तक नहीं थी रसाई मिरी


अभी था जला मैं अभी बुझ गया

अभी थी ज़ेहन में वो आई मिरी


जहाँ में जो बदनाम-ए-उल्फ़त हुए

तो तस्वीर उस ने जलाई मिरी


मिटाया जहाँ ने मुझे कि उसे

न भायी थी दिल की लगाई मिरी


सदाक़त कहा तो मिटाये गये

सज़ा बन गई लब-कुशाई मिरी


जहाँ में सदाक़त की जो बात की

हँसी बातिलों ने उड़ाई मिरी


#अमित_अब्र

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