शाइस्तगी नई है दीवानगी नई है
उल्फ़त से मेरे दिल की वाबस्तगी नई है
छूटी बहार-ए-दुनिया छूटी हसीन महफ़िल
उल्फ़त में आई मुझ में आवारगी नई है
उन की तरह हुआ हूँ तासीर-ए-इश्क़ में मैं
आग़ाज़-ए-इश्क़ में आई सादगी नई है
कुछ देर से मुहब्बत है ना-शनास मुझ से
कुछ देर की हमारी बेगानगी नई है
परवाह इस जहाँ की कितनी करें यहाँ हम
कब इश्क़ से जहाँ की नाराज़गी नई है
#अमित_अब्र
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