Tuesday, 21 December 2021

नमी का किन आँखों में आना हुआ

नमी का किन आँखों में आना हुआ
किसी के लिए कब ज़माना हुआ


ज़रूरी नही तुम जहाँ के लिए
तुम्हारा फ़साना पुराना हुआ


मुकम्मल ज़मीं अब हुई रेत सी
यहाँ संग का आशियाना हुआ


शहर अब ज़ियादा ज़रूरी हुए
नया गाँव भी क़ैदखाना हुआ


शजर अब हुए हैं यहाँ बे-समर
परिंदों, तुम्हारा ठिकाना हुआ


#अमित_अब्र

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