मुझे इश्क़ में वो सताकर गया
मिरे राज़ सबको बताकर गया
जो मंज़िल मिली मुंतज़िर ग़ैर की
मुसाफ़िर मुहब्बत छिपाकर गया
न थी साथ मेरे शहर की हवा
चराग़ों को सो मैं बुझाकर गया
मुहब्बत की दुनिया ये रौशन रहे
मैं जी इश्क़ में सो जलाकर गया
कहानी वो रौशन रही मुद्दतों
मुहब्बत मैं जिसमें निभाकर गया
#अमित_अब्र
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