Thursday, 23 December 2021

बिखर कर बँधी ज़ुल्फ़ बादल हुई

बिखर कर बँधी ज़ुल्फ़ बादल हुई
सिमट रात आँखों में काजल हुई 

न थे सामने वो तो सब ठीक था 
मिली आँख तो रूह घायल हुई

मिली थी असीरी मुझे इश्क़ में
मिले वो तो ज़ंज़ीर पायल हुई

ज़मीं से फ़लक से जहाँ से जुदा 
मुहब्बत में मेरे वो पागल हुई 

बयाँ इश्क़ उस ने किया इस तरह 
मुहब्बत भी आह उस की क़ाइल हुई
    
#अमित_अब्र
26-05-2019

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