मिरे हाल पर यूँ असर कर गया वो
मुझे आप से बे-ख़बर कर गया वो
नज़र कुछ न आया फिर उस के इलावा
मुझे नज़्र ऐसी नज़र कर गया वो
मुहब्बत के बादल ने मुझ को भिगोया
मुझे इश्क़ से तर-ब-तर कर गया वो
मिटी इश्क़ में रूह की तीरगी है
मुझे रौशनी का शजर कर गया वो
वफ़ा का सफ़र यूँ तो आसाँ नहीं था
वफ़ा का सफ़र भी मगर कर गया वो
उसी साथ नींद और सपने गये थे
मिरी शब को भी दोपहर कर गया वो
मैं अपने ही दिल का बियाबान था पर
मुझे इश्क़ का इक शहर कर गया वो
#अमित_अब्र
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