Thursday, 16 December 2021

शहर में रहा वो न घर में रहा

शहर में रहा वो न घर में रहा
गुनहगार पैहम सफ़र में रहा


मुझे छोड़ कर वो यहाँ से गया
मगर मैं उसी के असर में रहा


झुकाये रहा था यहाँ जो नज़र
उसी शख़्स की मैं नज़र में रहा


सफ़ीना हमारा न फिर बढ़ सका
भँवर ही भँवर था बहर में रहा


मुहब्बत हमारी मिटायी गई
फ़साना मगर ये ख़बर में रहा


#अमित_अब्र

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