Saturday, 18 December 2021

यार जो ख़्वाब हुआ जाता है

यार जो ख़्वाब हुआ जाता है

दिल ये बे-ताब हुआ जाता है  


रंज में था दरिया साहिब जो

क़तरा सैलाब हुआ जाता है


इश्क़ डूबा सर-ए-महफ़िल यारों

हुस्न गिर्दाब हुआ जाता है


आह-ए-मुफ़लिस ने जलाया मुझ को  

अश्क़ तेज़ाब हुआ जाता है


दौर-ए-उल्फ़त में हक़ीक़त था जो

शख़्स वो ख़्वाब हुआ जाता है

 

कौन सी मौज ख़िज़ाँ में आई

दश्त शादाब हुआ जाता है


शख़्स जो एक बहुत हासिल था 

अब वो नायाब हुआ जाता है


देख कर के दिल-ए-बिस्मिल का ग़म

आँखों में आब हुआ जाता है


छोड़ते बीच सफ़र जब अपने 

रस्ता फिर ख़्वाब हुआ जाता है


खुश हुई रात अमावस की है 

जुग्नू महताब हुआ जाता है


डूब कर रंग-ए-मुहब्बत में दिल 

आज सुरख़ाब हुआ जाता है


#अमित_अब्र

20-6-2016



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