राह-ए-सदाक़त है वो
सच की किताबत है वो
इश्क़ है, इश्क़ की राह में
सच्ची शहादत है वो
हौसला-ए-इश्क़ की इक
हसीं हिकायत* है वो
*कहानी
ईमान-ओ-दीन-ओ-ख़ुदा मेरा
मेरी इबादत है वो
पढ़ता हूँ उस में इश्क़
रब की इबारत है वो
लगता नहीं दिल उस बिन
दिल की आदत है वो
बचे हैं गुल तूफ़ाँ में भी
शाख़-ए-हिफ़ाज़त है वो
करूँ अब इश्क़ कि इश्क़ की
हर्फ़-ए-इजाज़त है वो
चाहे दिल असीरी उस की
हसीं हिरासत है वो
फैसला मेरे हक़ में हुआ
अच्छी शिकायत है वो
ख़िलाफ़ नफ़रत के
सख़्त हिदायत है वो
आँखों में लहू की बूँदें
एक बग़ावत है वो
दलीलें ख़िलाफ़ हैं तो क्या
मेरी हिमायत है वो
#अमित_अब्र
22 22 22
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