Tuesday, 16 November 2021

कभी जुस्तुजू कभी आरज़ू कभी जज़्बात होती हैं बेटियाँ

कभी जुस्तुजू, कभी आरज़ू 
कभी जज़्बात होती हैं बेटियाँ
कभी ज़िन्दगी, कभी रूह-ए-ज़िन्दगी 
तो कभी आब-ए-हयात होती हैं बेटियाँ 

कभी सवाल, कभी जवाब 
कभी पूरी किताब होती हैं बेटियाँ
कभी दिन, कभी रात, कभी आफ़ताब 
तो कभी माहताब होती हैं बेटियाँ

कभी शान ,कभी ईमान 
कभी ज़िन्दगी का अरमान होती हैं बेटियाँ 
कभी ज़मीं, कभी आसमान
तो कभी मुकम्मल जहान होती हैं बेटियाँ 

#अमित_अब्र






2 comments:

  1. बहुत बढ़िया ,मैने भी इसी विषय पर एक रचना लिखी थी अगर आपको दिलचस्पी हो तो ज़रूर साझा करूँगी

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  2. बहुत-बहुत शुक्रिया प्रीती जी ।
    नेकी और पूछकर
    जी ज़रूर पढ़ना चाहूँगा ।
    इंतज़ार रहेगा ।

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