Monday, 16 August 2021

मुश्किल सफ़र हमारा आसान हो रहा है

मुश्किल सफ़र हमारा आसान हो रहा है
मंज़िल भी आएगी इत्मीनान हो रहा है

हर-सू मिली सफ़र में ख़ाक-ए-वतन की ख़ुश्बू
गर्द-ओ-ग़ुबार भी सो जी-जान हो रहा है

कल तक था जो मुक़य्यद घर में किसी की ख़ातिर
आँगन का आज मेरे सामान हो रहा है

मुतलक़ हुई है पूरी ख़्वाहिश हमारे दिल की
आबाद मेरे जी का अरमान हो रहा है

करने को अब मुकम्मल हर ख़्वाब ज़िन्दगी के
ता'मीर इक नया हिन्दुस्तान हो रहा है

#अमित_अब्र


221  2122  221  2122

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