महासमर
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क़त्ल हो रहे हैं कब से कपोत् श्वेत
सुनाई अब हमें उनकी चीख पुकार चाहिए
गंगा ही नही नीलकंठ की भी है ये धरती
दुश्मन पर होना एक रौद्र प्रहार चाहिए
रक्तबीज बहुत गहरा हो चला है
काली के हाथों में खप्पर और कटार चाहिए
फिर हँस रहा है अधर्म धर्म पे पार्थ
फिर से झंकृत गांडीव की टंकार चाहिए
हो तैयार महाप्रयाण को, कर महासमर
अब अरि के हर रूप का संपूर्ण संहार चाहिए
#अमित_अब्र
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