Thursday, 14 November 2019

उल्फ़त में उल्फ़त की ख़ातिर उल्फ़त पे हम ने वारी दुनिया

उल्फ़त में उल्फ़त की ख़ातिर उल्फ़त पे हम ने वारी दुनिया
हासिल उल्फ़त हुई नहीं भूल गई हम को सारी दुनिया

तेरी ख़ातिर दुनिया छोड़ी पर साथ तुम्हारा पा न सके
कूचे में तेरे सो हम ने तन्हा आज गुज़ारी दुनिया

रौशन दिल था, रौशन थी दुनिया भी लेकिन बाद तुम्हारे
आयी दिल में वीरानी और बिखर गई हमारी दुनिया

दीदार-ए-यार हुआ नहीं तो थे चश्म-ए-तर जब लौटे दर से
आज़ार-ए-ग़म-ए-फ़ुर्क़त से हो गई दिल की मेरे भारी दुनिया

अपनों ने छोड़ा तनहा आई जब है मुश्किल जीवन में
गिला करे क्या ग़ैरों की जब अपनों से ही हारी दुनिया

झूट की फ़ितरत, नफ़रत और अदावत दुनिया की तक़दीर हुए
इस दौर-ए-रंजिश में आज हुई रंज-ओ-ग़म की मारी दुनिया

ईमान, मुहब्बत,इमदाद की आदत, क्यूँ हो इन से दूर हुए
ये ही ख़ू* तेरे तो दुनिया को बनाते हैं प्यारी दुनिया

*आदत


बर्बाद किये क्यूँ दुनिया को हो तुम नाम-ए-मजहब में जब कि

नाम-ए-मजहब में ही ख़ुद तुम ने थी कभी सँवारी दुनिया


#अमित_अब्र


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