Friday, 15 November 2019

बाद तुम्हारे मेरी कहानी

बाद तुम्हारे मेरी कहानी 
प्यासा सहरा और वीरानी

उल्फ़त की है यही निशानी
माँगें तुम से हर क़ुर्बानी
 
उन बिन बस है ग़म और अज़ाब  
उन बिन है ग़मगीन जवानी 

रक़ीब हुआ है मुंसिफ़ सो अब  
उल्फ़त चाहत सब बे-मा'नी

भँवर में आई कश्ती मेरी
दरिया ने जब की मनमानी 

है मंज़िल राह-ए-मुहब्बत की
ऊँचा कोह* या गहरा पानी

*पर्वत 

उल्फ़त को तुम सहल न जानो
एक सफ़र ये रेगिस्तानी

 
#अमित_अब्र 

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