अब उन से याराना क्या होगा
अब शाद ज़माना क्या होगा
जब मुझ से वो शर्मिन्दा हैं
घर उन के जाना क्या होगा
मेरे दिल के सिवा अब मेरे
ज़ख़्मों का ठिकाना क्या होगा
मिलूँ नहीं उन से लेकिन ऐ दिल
न मिलने का बहाना क्या होगा
बाद तुम्हारे जी में मेरे
उल्फ़त का आना क्या होगा
छोड़ गया जब घर वो मेरा
आबाद वीराना क्या होगा
आग़ाज़-ए-कहानी ग़मगीन हुई
अंजाम-ए-फ़साना क्या होगा
सुन अफ़साने दीवानों के
कोई और दीवाना क्या होगा
मान ली सब ने जब बातें उस की
फिर मेरा बताना क्या होगा
#अमित_अब्र
22 22 22 22
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