Thursday, 6 January 2022

नज़र में वही जो रही रात भर

नज़र में वही जो रही रात भर
रही बात कुछ अनकही रात भर 


बयाँ कर गया जो फ़साना उसे       
कही फिर कहानी वही रात भर


लबों ने नहीं जब फ़साने कहे 
नज़र ने कहानी कही रात भर


मिटाये गये जो हसीं ख़्वाब तो
नदी आँख़ में इक बही रात भर


सहर की न थी आस जिस रात को
वही रात हमने सही रात भर


#अमित_अब्र

No comments:

Post a Comment