नज़र में वही जो रही रात भर
रही बात कुछ अनकही रात भर
बयाँ कर गया जो फ़साना उसे
कही फिर कहानी वही रात भर
लबों ने नहीं जब फ़साने कहे
नज़र ने कहानी कही रात भर
मिटाये गये जो हसीं ख़्वाब तो
नदी आँख़ में इक बही रात भर
सहर की न थी आस जिस रात को
वही रात हमने सही रात भर
#अमित_अब्र
No comments:
Post a Comment