दर से तेरे दूर
जीना ना-मंज़ूर
तेरी वजह से ही
दिल में मेरे नूर
उल्फ़त की दुनिया तो
दुनिया से मजबूर
वो खुश तो उल्फ़त में
टूटा जी मसरूर
उल्फ़त ही रौशन है
नफ़रत है बे-नूर
ज़ुल्मत में ख़ुर्शीद
अँधियारे मग़रूर
रहमत है गुमनाम
ज़ालिम है मशहूर
सरमाये का राज
राजा बे-मक़्दूर
ताजिर की ताज़ीर
भूखे हैं मज़दूर
वहशत है याँ शाद
इशरत है रंजूर
#अमित_अब्र
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