तुम्हारी याद में मंज़र यहाँ जो मुस्कुराये हैं
हसीं कितने हुए तुम ये ज़माने को बताये हैं
तुम्हारा ज़िक्र आया है मुहब्बत गुनगुनाई है
मुहब्बत के तराने जुगनुओं ने भी सुनाये हैं
तुम्हारी ज़ुल्फ़ का जादू फ़लक पर आज कुछ यूँ है
कि सहराओं में भी देखो घनेरे अब्र छाये हैं
यक़ीं मानो रखा तुम ने क़दम दर पर हमारे जब
सितारे चाँद भी तब आसमाँ में मुस्कुराये हैं
तुम्हारी याद आती है मिरा दिल मुस्कुराता है
हमारे ख़्वाब में भी ख़्वाब अब तेरे समाये हैं
मुहब्बत पे यक़ीं कर जब सनम को हम ने है देखा
मनाज़िर ख़ूब हर जानिब नज़र फिर आज आये हैं
मुहब्बत की कहानी से अभी तक हम रहे ग़ाफ़िल
मगर देखा तुम्हें तो इश्क़ के एहसास आये हैं
मुहब्बत के सफ़र में कुछ तो है लग़्ज़िश हुई हम से
सफ़र के रास्ते जो आज हमसे वो छुपाये हैं
हमारा बस यही पैग़ाम है नफ़रत की दुनिया को
मुहब्बत से यहाँ हर फ़ासले हमने मिटाये हैं
#अमित_अब्र
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