ख़ुदा मैं तुम्हारी दुआ चाहता हूँ
सनम का अब अपने हुआ चाहता हूँ
सबा भी हुई नर्म छूकर जिसे
बदन मख़मली वो छुआ चाहता हूँ
अगर मौत ही अब मिलाये सनम से
तो जीना नहीं मैं मुआ चाहता हूँ
मिला दे मुझे जो जुआ ज़िन्दगी से
वही खेलना मैं जुआ चाहता हूँ
मुहब्बत हुई गर पशेमान मुझ से
मुहब्बत की मैं बद-दुआ चाहता हूँ
#अमित_अब्र
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